अजनबी शहर में .......... अजनबी लोग कैसे .......... कहू दास्ताँ........मै चला था कुछ सोच कर ...लेकिन हकीकत है की आज भी अजनबी हूँ पहचान बढ़ी लोग जुटे ......पर सब के सब मतलब के किससे कहू क्या कहू कैसे कहू .....जो मिला उसे कहे लेकिन वो किसी और को .....ऐ मेरे दोस्त जबाब दो