आज मै एक ऐसे महा दलित बस्ती में गया जहाँ के स्कूली बच्चे खुले आकाश में पढ़ने के लिए मजबूर है , हैरानी की बात है की नितीश सरकार कहती है की महादलित में शिक्षा के अलख जगा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जायेगा . उस दिशा में सरकार कई योजना भी चलाई लेकिन हैरानी की बात है की अधिकारी केवल लापरवाही के कारन सब बर्बाद कर रहे है , उस विद्यालय में तिन घंटे हमने बिताये लेकिन मास्टर नहीं आये जब की बच्चे आकर पढाई सुरु होने का इंतज़ार कर रहे थे , उन्हें पोषक के राशी नहीं मिली , मध्यान्ह भोजन नहीं मिलता है जब की वह पाच शिक्षक पोस्टेड है , सबसे हैरानी की बात है की इतने दिनों के बाद भी स्कूल के भवन नहीं बना है , जब की नक्सल प्रभावित जिला होने के कारन पैसे की कोई कमी नहीं है, ऐसे में भला केंद्र और राज्य सरकार की बात निश्चित ही झूठी है|