Friday, November 13, 2009
सच
सच ही कहा गया है की इन्सान कुछ भी कर ले सचाई सामने आ ही जाते है हकीकत है की लोग बनावटी पन कर हालत मोड़ देते है पर कितने दिनों तक सचाई छिपी जा सकती है मई कहता हूँ सामने आकर सामना करना जरूरी है सच चाहे कितनी ही भी कड़वी हो सच सच है और झूठ झूठ मेरे संग अगर सच बताना हो तो मेल करे @जीमेल पर मै आप के साथ हूँ एक पत्रकार होने के नाते
Wednesday, November 11, 2009
एक सवाल सबके लिए
एक उदासी पिछले कई दिनों से मेरा पीछा नही छोड़ नही रही है कभी कभी तो लगता है की सब कुछ दिखावा है पर क्या कर सकता हूँ ऐसे जगह पर पत्रकारिता करना कम चुनौती नही है जहा सिर्फ़ भ्रस्टाचार है अभी हल के दिनों में मै जिले के एक गाँव में कवरेज़ के लिए गया जहा एक महिला पिछले कई दिनों से न्याय के लिए जनता दरबार जिला से राजधानी तक चक्कर लगा चुकी है पर न्याय नही मिला जब की वह सही है उसे न्याय मिलना चाहिए पर नही ..... उसे अधिकारी न्याय न दिला कर एक दोषी को वो सम्मान दे दिया अब सवाल उठता है की क्या जमुई जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एस तरह क्या सही शासन की कल्पना उचित है .....वो महिला के पति कारपेंटर है गरीब है अपनी हक़ के लिए कहा कहा नही दौडी पर सच हारती दिख रही है उसके अनुसार उसे न्याय के लिए क़र्ज़ लेना पड़ा और आज वह क़र्ज़ में डूब चुकी है पर हैरत की बात है की जिले में तैनात अधिकारी मनमानी कर , सब कुछ मिटटी में मिला दिए .... वैसी कई घटना आज भी जमुई में है जहा डी ऍम भी चुप हो कर सब कुछ करा रहे है अब भला कैसे कहा जाएगा की मनमोहन और नीतिश का सपना सच होगा मैंने कई लोगो से पूछा की समाधान क्या है पर जबाब नही मिला अब आप ही बताये की क्या हो सकता है
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