Friday, March 5, 2010

वाह रे समाजवाद

हमारे संविधान में अगर समाजवाद का जिक्र प्रस्तावना में है तो छठे वेतन के लागु हो जाने के बाद जो स्थिति पैदा हुई है वह कैसा असर लायेगा भले ही बिहार सरकार या केंद्र सरकार यह दावा करे की उनकी विकास दर तेजी से बढ़ा है पर हकीकत आज जो है वाह चिंताजनक है महंगाई की बात हो या आमदनी के मामले में असमानता की हमारे देश के कई घर के लोग को आज भी दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती क्या ऐसे में हम कह कह सकते है की देश के गरीबो के लिया उठाये गए कदम सही है

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