Friday, July 22, 2011

maha dalit

आज मै एक ऐसे महा दलित बस्ती में गया जहाँ के स्कूली  बच्चे खुले आकाश में पढ़ने के लिए मजबूर है , हैरानी की बात है की नितीश सरकार कहती है की महादलित में शिक्षा के अलख जगा  कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जायेगा . उस दिशा में सरकार कई योजना भी चलाई लेकिन हैरानी की बात है की अधिकारी केवल लापरवाही के कारन सब बर्बाद कर रहे है , उस विद्यालय में तिन घंटे हमने बिताये लेकिन मास्टर नहीं आये जब की बच्चे आकर  पढाई सुरु होने का इंतज़ार कर रहे थे , उन्हें पोषक के राशी नहीं मिली , मध्यान्ह भोजन नहीं मिलता है जब की वह पाच शिक्षक पोस्टेड है , सबसे हैरानी की बात है की इतने दिनों के बाद भी स्कूल के भवन नहीं बना है , जब की नक्सल प्रभावित जिला होने के कारन पैसे की कोई  कमी नहीं है, ऐसे में भला केंद्र और राज्य सरकार की बात निश्चित ही झूठी है|

Wednesday, June 29, 2011

hum sab

राह चाहे जितनी भी हो कठिन चलना है मगर
उदासी चाहे कितनी भी हो मगर हसना है 
नहीं रुकेंगे कदम 
चाहे लाख मुसीबत हो 
परेशानी हो
या बाधा 
चलना है तो बस चलना है 
हसना है क्यों की लोग कहेंगे रो रहा है 
दुखी है 
वो भी हसेंगे मेरे हालात पर 
कोई खुशी देगा यहाँ सब का हल एक है
नहीं चलेंगे तो हम राह जायेंगे पीछे 
नहीं हसेंगे तो 
डॉक्टर कहेगा 
टेंशन 
ब्लड प्रेसर होगा 
हम खो जायेंगे 
इसलिए सब बढे सब हँसे 

Wednesday, March 9, 2011

jahan

आज हर पल देखता हूँ की दुनिया बदल सी गई है मेरे लिए.
रात में कुछ भी नहीं दिखता सब जानते है 
पर यहाँ तो दिन में भी लोग अंधे के सामान है
किस बाजार में बेचू मै
यहाँ तो कोई खरीदार ही नहीं जो लगा सके कीमत मेरी 
मै नहीं हूँ  कीमती  लेकिन  हूँ मै भी चीज भी 
इंतज़ार था की वो आयेंगे पूछेंगे कीमत पर
सब के सब ......
ऐसा नहीं की कोई जनता हियानहीं पर हैरान हूँ की कोई आया ही नहीं
फिर भी खरा हूँ इंतज़ार में ....
अब ऐसा भी नहीं की मै कोई वास्तु हूँ पर उस जैसे ही हूँ 
जन है पर बेजान हूँ,
जुबान है पर बेजुबान हूँ 
सब है पर कुछ भी नहीं भरा हूँ पर खली हूँ
यही तकलीफ है की मै हूँ और कोई नहीं 
या सब है मै नहीं 
चिलाता रहा पर किसी ने नहीं सुना 
अब भला मै कैसे गलत हूँ 
भरे बाजार में मै तमासबिं हूँ 
मै आदमी हूँ पर लाचार हूँ 
मै आदमी हूँ पर लाचार हूँ 
हम  भी चाहते है एक दिवाली मनाये  पर 
मै क्या करू लाचार हूँ. 

Thursday, February 17, 2011

chuupi

एक आदमी न्याय के लिए किस तरह परेसान होता है ये कोई नई बात नहीं है लेकिन आखिर क्यों ये सवाल उन सब के लिए होगा जो इस बात में अपना दावा करते है ... चाहे कोई सामाजिक संगठन हो या कोई अन्य संसथान लेकिन किसी न किसी को आगे आना होगा नहीं तो जिस तरह से गिरावट आ रही है सायद एक दिन सभी चीज जिसमे विस्वास भी है धराम से जमीं पर गिरेगा तब क्या होगा |