Tuesday, October 6, 2009
जहा नक्सल जैसी समस्या हो जाहिर सी बात है वहा शासन में कही न कही खामिया है उस में अगर पत्रकारिता भी आम लोगो के लिए न होकर स्वार्थ पर आधारित हो तो समस्या भला कैसे खत्म होगी बिहार के एक जिले में ऐसा ही कुछ चल रहा है जहा अधिकारी से आम लोग तो परेशां है ही अब लोग पत्रकारों से भी लग भये खाने लगे है अक्सर लोग मुझसे कहते है जहा पत्रकार ठेकेदार बन गए है हाल ही में ख़बर मिली की एक पत्रकार ने एक अधिकारी से लैपटॉप की मांग कर दी है फिर क्या कुछ ठेकेदार जो अधिकारी के आदमी है दफ्तर में जाकर पत्रकार को उनके जिम्मेदारी की याद दिला दिया तो मै कहता हूँ कौन जिम्मेदार है इसके लिए शयद वो ख़ुद क्यों की अगर आप इमानदार है तो आप का सम्मान बचेगा इस लिए मै कहता हूँ चल उठ कलम के सिपाही जग निद्रा तोड़ .......... उठ देख समय की पुकार को याद कर बापू को याद कर नेहरू को याद कर सुबह्श को याद कर सब को जिसने हमें यह आजादी दिलाई ....................भूल रहे हो अपने आप को जहा लोगो को उम्मीद है की तुम संभालोगे जहा देश तुझे पुकारती है की बेटे मेरा ख्याल रखना
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
sirf sach ke liye kalam uthai hai ? behad khubsurat zazba hai. is zazbe ko mera salam ! lekhan me dhaar to hai, likhen, sirf sach likhen; main aapke saath hun bandhu !
ReplyDeleteanand v. OjhA
आपका स्वागत है ।
ReplyDeleteगुलमोहर का फूल