Sunday, October 3, 2010

बेचारे पत्रकार

विधान सभा चुनाव के कवरेज के लिए चुनाव आयोग द्वारा पत्रकारों ने पास के लिए पी आर ड़ी जमुई में आवेदन दिया है लेकिन खबर आ रही है की जिले की पुलिस कप्तान ने कई पत्रकारों का आवेदन रोक कर रख लिया है कारन का पता नहीं लेकिन पता चला है की नक्सल प्रभावित जिला होने के कारन छान बिन के बाद ही सबको पटना भेजा जायेगा पुलिस को सायद पत्रकारों पर भरोसा नहीं है ,,, अगर ऐसा है तो कौन दुर्भाग्यसाली है पत्रकार या प्रसासन क्या बिना भरोसा किये समाज में लोकतान्त्रिक व्यवस्था कायम हो सकता है सायद बिलकुल नहीं , मेरे अनुसार लोगो को एक दुसरे पर भरोसा करना चाहिए और अगर किसी को सक हो तो मिल बैठ कर मामले को समझना चाहिए नहीं तो मेरे अंदाज से पत्रकारिता के लिए ये सब ठीक नहीं है ,,, पर इस पर पहल कौन करेगा

क्या ये चुनावी चैनल है

बिहार विधान सभा चुनाव सुरु होने के साथ ही बिहार में छानेलो की बढ़ सी आने लगी है मुझसे लोग पूछते है की अचानक ये क्या हो रहा है कही ये चुनावी चैनल तो नहीं है ... पर ये तो आने वाला समय ही बताएगा की माजरा क्या है मेरे कई पत्रकार दोस्तों ने भी इन छानालो में अपनी परे सुरु कर दी है ... पटना और रांची से एक साथ कई चैनल सुरु हो गए तो है लेकिन कई अभी आना बाकि है इस बारे में एक बात कहना चाहूँगा की कई छानेल तो कही चल भी नहीं रहा है लेकिन उसके लोग लोगो लेकर जिले में घूम रहे है जिनसे लोग पूछते है की ये किस नंबर पर दीखता है यहाँ बेचारे पत्रकर चुप हो जाते है और कहते है की अभी कुछ दिन बाद दिखेगा आखिर ये क्या माजरा है ......

बदमिया देवी नाव चलाती हँ

नक्सल प्रभावित इलाके में अगर किसी महिला को नाव चला कर अपने परिवार को चलाने की बात हो तो कुछ अजीब सा लगता है लेकिन हकीकत है की एक महिला है जो ऐसा करती है उसमे हिम्मत है, साहस है एक महिला हो कर बिना किसी खौफ के वो नाव चलाती है सबसे हैरानी की बात है की जहा सरकार के लोग कभी जाने से कतराते है वह वो नाव चला कर एक मिसाल कायम कर दिया है जमुई जिले के खैरा प्रखंड घसको टार की बदमिया देवी जिसके तिन बेटा और एक बेटी है नाव चला कर अपने परिवार का पालन पोसन करती है , गडही डैम में यह महिला जो अनपढ़ है लेकिन जज्बा ऐसा है की पढ़ी लिखी महल भी कम ही होती है जो ऐसा कम कर एक मिसाल कायम करती है यह पूरा इलाका नक्सल प्रभावित है और जहा प्रशासन और सरकार के लोग जाने का साहस नहीं कर पाते है बदमिया देवी नाव चलाकर एक अनूठा काम किया है बदमिया देवी कहती है की ऐसा करने से उसे अच्छा लगता है क्यों की यह एक समाज सेवा है की मै किसी को मंजिल तक पहुचने में मदद करती हूँ बदमिया देवी को मलाल है की सरकार द्वारा चलाये जा रहे कोई भी योजना उसके गाँव में नहीं पंहुचा है लेकिन मै फिर भी अपने इरादे में डटी हूँ और अब यही करना है उसके अनुसार मुझे कभी कभी डर लगता है लेकिन क्या करू....

Sunday, August 1, 2010

फ्रेंड सिप डे

बधाई हो आज का दिन का महत्वा चाहे जो हो लेकिन मित्रता का नाम है तो बेहतर है ही , हम आप सभी इस दिन कसम खा ले की इस धर्म को आजीवन निभाएंगे दोस्ती के इस त्यौहार में सब मिलकर एक प्रतिज्ञा ले खून के रिश्ते से भी बढ़कर है ये रिश्ता जो इन्सान ने खुद बनाया है ...... ले लो सलाम मेरा हर मोड़ पर खड़ा हूँ चाहे कुछ भी मुसीबत हो मै रहूँगा दोस्त के लिए

Thursday, May 13, 2010

मै जल्द ही फिर वापस आ रहा हूँ कुछ और कहने को रस्ते की तलास में अभी बहतक रहा हूँ hakikat hai par sach hai hum sab ke sab ..........
मै जल्द ही फिर वापस आ रहा हूँ कुछ और कहने को रस्ते की तलास में अभी बहतक रहा हूँ hakikat hai par sach hai hum sab ke sab ..........

Friday, March 5, 2010

वाह रे समाजवाद

हमारे संविधान में अगर समाजवाद का जिक्र प्रस्तावना में है तो छठे वेतन के लागु हो जाने के बाद जो स्थिति पैदा हुई है वह कैसा असर लायेगा भले ही बिहार सरकार या केंद्र सरकार यह दावा करे की उनकी विकास दर तेजी से बढ़ा है पर हकीकत आज जो है वाह चिंताजनक है महंगाई की बात हो या आमदनी के मामले में असमानता की हमारे देश के कई घर के लोग को आज भी दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती क्या ऐसे में हम कह कह सकते है की देश के गरीबो के लिया उठाये गए कदम सही है

Thursday, February 11, 2010

हैप्पी ....

एक बार फिर वेलेंतिने डे आ गया है लोग फिर अपने लोगो को हैप्पी हैप्पी बोलेंगे पर मै अज से ही उन सभी को हैप्पी हैप्पी बोल रहा हूँ जिन्हें कोई नहीं बोलता है ..... हैप्पी वलेंतैने बाय ......बाय

Monday, February 8, 2010

वाह रे पत्रकारिता

अजीब हाल है नेसनल चैनल का हाल जिसके लोग अब जिलो में तैनात स्ट्रिन्गेरो से झगरे भी करवा रहे है जी हा हम बात कर रहे बाढ़ की तरह आये चेनलो का अब तो चेनलो के पास नाम भी नहीं मिल रहा है .... गौर करे एक ही तरह के कई नाम २४ तो आम सब्द बन गया है हर के साथ जुड़ा है ये ...... और तो और अब ये चेनल वाले जिलो में एक नहीं दो क्या तिन भी स्ट्रिन्गेरो को रख दिया गया है ये आपस में अक्सर भीड़ते दिखते है अभी हाल ही में बिहार के एक जिले के साइबर कैफे में देखने को जो मिला पत्रकारिता के लिए ठीक नहीं कहे जायेगा एक खबर दो दो रिपोर्टर भेज रहे और दावे करा रहे है की मै हूँ असली ... हाला की दोनों के साथ जो सच्चाई हो पर अक्सर देखा जाता है की नेशनल चेनेल वाले ऐसे ही लोगो से कम करवा लेती है और मुद्रा देने के समय पत्रकार को बदल दिए जाते है मै सभी के बारे में नहीं कह रहा हूँ ........ लेकिन कुछ तो है ही और तो और ये चेनल ऐसे भी लोगो को पत्रकार बना देते है जिन्हें इलेक्ट्रोनिक मीडिया का अ बी सी का भी पता नहीं है हैरत की बात है न ऐसे में फिल्ड में कई रिपोर्टर को काफी मुस्किलो का सामना करना पड़ता है .... अब मेरा कहना है की क्यों ऐसा हो रहा है क्या ऐसे में पत्रकरित का मूल्य कितना बचेगा ?

Friday, January 29, 2010

हर राह पर मिलू जो कहते है की ..... तुम कहा हो ..... मै तो हर मोड़ पर हूँ साथ सबके मिला करो छुप छुप कर या खुले में सब के सामने ...... पर मिला तो करो ...... इन्तेजार में हर पल रहता हूँ कीआये वो सबके सामने ......

Monday, January 25, 2010

२६ जनवरी

आप सब को बधाई लेकिन अभी भी समस्याएं है जिन्हें दूर करना है सो आप हम सभी चिंतन करे कसमे खाए की .... देश की भलाई के लिए क्या उचित है.......

Friday, January 1, 2010

नया साल

खाव्हिस थी की तेरे पनाहों में रह करू इस का वेल्कोम पर उड़ा दिया तुफ्फान ने हर को ......... मेरे तरफ से आप सभी को हैप्पी न्यू इयर