Wednesday, August 26, 2009
Tuesday, August 25, 2009
आज जो कुछ भी हुआ वो पत्रकारिता का अपमान है , राज्य के मंत्री ने पत्रकारों को बहार जाने को कहा , सुखाड़ को लेकर बैठक और मीडिया को भाग लेने से मनाही भला कैसी पारदर्शिता क्यों पि आर डी ने पत्रकारों को बुलाया था , क्या सूबे के मुख्यमंत्री की यही सकारात्मक सोच का नतीजा है सच में आज पत्रकार मर्माहत है क्या इसी के लिए लोग आपमान सहेंगे हैरत की बात है की मंत्री भी उसी बिभाग के है जहा पत्रकारों से सीधा संपर्क है यानि सुचना प्रसारण मंत्री , लोगो के मन में यह सवाल है की क्या पत्रकार की यही सम्मान देने का वडा है , सच में ठीक ही कहा गया है लेखनी के सिपाही सिर्फ़ अपमान के घूंट पी रहे है चाहे सरकार किसी की रहे जी हा हम बात कर रहे है बिहार के जमुई जिले की सम्हार्नाल्या में बैठक की जहा बैठे पत्रकारों को उठा दिया गया .......................................................कैसे होगी सम्मान की रक्षा , लेखनी को कैसे दे मजबूती
Sunday, August 23, 2009
कैसे कोई पत्रकार नक्सल प्रभावित क्षेत्र पत्रकारिता करता है वह ख़ुद वही जानता है बिहार के एक नक्सल जिले में जहा वह रिपोर्टिंग करता है वह झारखण्ड से सटा है आए दिन एक चैनल के लिए ख़बर बनता है खासकर जब नक्सल अटैक होता है तब सूचना के लिए मारामारी है सबसे बुरा तब जब पुलिश कुछ भी बताती नही है एसपी , डी ऍम सब चुप रहते है ....... हाल के दिनों में एक पोलिश गस्ती दल पर नाक्साली हमले में जवान शहीद हो गए वह रिपोर्टर क्या करे ...... अपने प्रोफ्फेसन के साथ नयाय चाहता है
Saturday, August 22, 2009
कैसे चलू कदम साथ नही देता.... कैसे देखू नजर साथ नही देती तुम अगर साथ दे तो हर चीज हो हमारी अगर तुम नही तो ज़मी है खाली असम है खालीये हकीकत है दुनिया वाले दोस्त भी दुश्मन भी सिर्फ़ हम अकेले .......... मेरी हर चीज हो तुम्हारी और हो तुम्हारी मेरी ...... मेरी हर मंजिल तुम्ही से है शुरू और अंत करा दो यकीं देखाना चाहता हूँ करा दो यकीं मुझे मै
Friday, August 21, 2009
tum
तुम कहती हो .... मै नही शामिल हूँ तो फिर क्यों जिंदगी में आई ...तुम कहती हो मै थोड़े ही ॥ कई सवालों के बिच सिर्फ़ तुम ने........ तुझे देखने के बाद या तुम नही दिखती तब के हालत पर गौर करो बचपन से अभी तक न डाला ऐसा .....तुम साथ देती रहो एक सच है मै दुनिया को जबाब दू की अपने आप को मै खुश कैसे रखू ,तेरे हर सवाल का जबाब देना चाहता हूँ पर तुम ..... एक दर्द लिए फिर रहा हूँ उन galeyon में ...... सवालों को लेकर ..... सुनाने के लिए ...... jabab के लिए मिटना चाहता हूँ , अनजाने डगर पर चल पड़ा हर पल तलाश है उसकी .... इंतजार ही वो आए बैठे सुने सुनाये
हम ख़बर छाप देंगे ........... नही सर ...... मै बर्बाद हो जाऊँगा .......तो कुछ खर्च करो ........क्या सर ..........विज्ञापन दो ......ठीक है कितना पैसा लगेगा ...........दो हजार.........................................................................................., यही है एक भ्रस्त वयस्था का पत्रकरिता जो छोटे इलाको में चल रहा है जहाँ प्रबंधन का दबाब में सब कुछ चल रहा है , कही पत्रकार ठेकेदार है तो कही कच्छ और ......
illegal
यहाँ लोग चाहते है की भ्रस्ताचार के खिलाफ जगह पेपर वाले लोग देकर उनकी आवाज बने लेकिन हैरत की बात है की लेखनी कुंद हो गई हैक्यों क्यों आखिर कौन जिम्मेदार है शायद हम सभी
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