Friday, August 21, 2009

tum

तुम कहती हो .... मै नही शामिल हूँ तो फिर क्यों जिंदगी में आई ...तुम कहती हो मै थोड़े ही ॥ कई सवालों के बिच सिर्फ़ तुम ने........ तुझे देखने के बाद या तुम नही दिखती तब के हालत पर गौर करो बचपन से अभी तक न डाला ऐसा .....तुम साथ देती रहो एक सच है मै दुनिया को जबाब दू की अपने आप को मै खुश कैसे रखू ,तेरे हर सवाल का जबाब देना चाहता हूँ पर तुम ..... एक दर्द लिए फिर रहा हूँ उन galeyon में ...... सवालों को लेकर ..... सुनाने के लिए ...... jabab के लिए मिटना चाहता हूँ , अनजाने डगर पर चल पड़ा हर पल तलाश है उसकी .... इंतजार ही वो आए बैठे सुने सुनाये

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